TRS College Rewa Hosts Seminar : विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों में नई शिक्षा नीति के प्रति उत्साह एवं जागरूकता का संचार किया।
TRS College Rewa Hosts Seminar-टीआरएस कॉलेज रीवा में एनईपी-2020, अध्यादेश 14(1) व 14(2) पर संगोष्ठी आयोजित-रीवा, मध्य प्रदेश – शासकीय ठाकुर रणमत सिंह (टी.आर.एस.) स्वशासी महाविद्यालय, रीवा के समाजशास्त्र विभाग ने “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में समाजशास्त्र की भूमिका: अध्यादेश 14(1) एवं 14(2) के विशेष संदर्भ में” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी के कुशल मार्गदर्शन एवं निर्देशन में सम्पन्न हुआ। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के मूल उद्देश्यों से अवगत कराना तथा मध्यप्रदेश शासन द्वारा लागू किए गए नवीन अध्यादेश 14(1) (स्नातक) एवं अध्यादेश 14(2) (स्नातकोत्तर) के प्रावधानों, उनकी उपयोगिता तथा उच्च शिक्षा में उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श करना था। इस आयोजन ने शिक्षा के क्षेत्र में आ रहे इस बड़े बदलाव को समझने का एक सार्थक मंच प्रदान किया। टी.आर.एस. कॉलेज रीवा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं अध्यादेश 14(1) व 14(2) पर संगोष्ठी आयोजित। जानें एनईपी के क्रियान्वयन में समाजशास्त्र की भूमिका एवं विशेषज्ञों के विचार।
विषय विशेषज्ञों का ऑनलाइन सहयोग-
Online Participation of Experts
कार्यक्रम को गहन अकादमिक दृष्टि देने के लिए देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के जाने-माने विद्वानों ने ऑनलाइन सहभागिता की-
- डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता- प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र, केन्द्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ।
- डॉ. बी. के. सिंह- महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी।
- डॉ. विनोद रस्तोगी- विभागाध्यक्ष, पी.जी. कॉलेज, सतना।
संगोष्ठी का शुभारंभ एवं स्वागत उद्बोधन
Inaugural Session & Welcome Address
संगोष्ठी के संयोजक एवं समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश शुक्ल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि “समावेशी एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा की आधारशिला समाजशास्त्र है।” उन्होंने बताया कि एनईपी-2020 शिक्षा को अधिक समावेशी, कौशलोन्मुख और लचीला बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। समाजशास्त्र विद्यार्थियों को सामाजिक वास्तविकताओं, समानता और सामाजिक उत्तरदायित्व की वैज्ञानिक समझ प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से नई शैक्षणिक व्यवस्था का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।

विशेषज्ञों के विचार-Keynote Highlights by Experts
- डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता-(केन्द्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ) ने कहा कि “एनईपी-2020 ज्ञान, कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय पर आधारित है। अध्यादेश 14(1) और 14(2) विद्यार्थियों को बहुविषयक अध्ययन, लचीलापन और रोजगारोन्मुख शिक्षा के नए अवसर प्रदान करते हैं।”
- डॉ. बी. के. सिंह-(काशी विद्यापीठ, वाराणसी) ने कहा कि समाजशास्त्र विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, बहुविषयक दृष्टिकोण और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति वैज्ञानिक समझ विकसित करने का सशक्त माध्यम है।
- डॉ. महानन्द द्विवेदी-(विशिष्ट अतिथि) ने कहा कि एनईपी-2020 के क्रियान्वयन में समाजशास्त्र समावेशी, न्यायसंगत एवं समान अवसर आधारित शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करता है।
- डॉ. रचना श्रीवास्तव-{रीवा }ने कहा कि यह नीति समाजशास्त्र के माध्यम से विद्यार्थियों में नागरिक चेतना, सामाजिक संवेदनशीलता एवं मानवीय मूल्यों का विकास करती है।
- डॉ. मोहम्मद परवेज-ने उच्च शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में इस नीति को अहम बताया।
शिक्षकों एवं विद्वानों का योगदान
Contributions of Faculty & Scholars
इस अवसर पर डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव, डॉ. शाहेदा सिद्दीकी, डॉ. स्वाति शुक्ला, डॉ. फरजाना बानो, प्रो. शालिनी पाण्डेय, डॉ. आभा द्विवेदी, डॉ. निशा सिंह, डॉ. प्रियंका पाण्डेय, डॉ. गुंजन सिंह एवं डॉ. प्रियंका तिवारी ने भी अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि एनईपी-2020 विद्यार्थियों को बहुविषयक, कौशलोन्मुख शिक्षा प्रदान कर उनके समग्र व्यक्तित्व विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।
संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र- Interactive Q&A Session
संगोष्ठी का प्रश्नोत्तर सत्र अत्यंत जीवंत रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने अध्यादेश 14(1) एवं 14(2), क्रेडिट प्रणाली, बहुविषयक अध्ययन, इंटर्नशिप, कौशल विकास एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान पाया। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों में नई शिक्षा नीति के प्रति उत्साह एवं जागरूकता का संचार किया।
समापन एवं आभार प्रदर्शन-Concluding Remarks & Vote of Thanks
- कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. निशा सिंह ने किया। तत्पश्चात, प्रो. शालिनी पाण्डेय ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्री योगेश निगम एवं श्री रत्नेश मिश्रा का विशेष सहयोग रहा।
- समन्वयक-डॉ. अखिलेश शुक्ल (विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग)
- संस्थान-शासकीय ठाकुर रणमत सिंह स्वशासी महाविद्यालय, रीवा (म.प्र.)
निष्कर्ष-Conclusion-टी.आर.एस. कॉलेज, रीवा में आयोजित यह संगोष्ठी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं अध्यादेश 14(1) व 14(2) को समझने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुई। इसने यह स्पष्ट किया कि समाजशास्त्र न केवल सामाजिक संरचना को समझने का माध्यम है, बल्कि शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस आयोजन ने विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, कुशल एवं सामाजिक रूप से जागरूक नागरिक बनने की प्रेरणा दी।