Rohtak-domestic violence/child abuse case : मां-बाप की लड़ाई ,पिता ने बेटी पर उतारा बीबी कस गुस्सा मां बोली हमारा निजी मामला नहीं करना कानूनी कारवाही
Rohtak-domestic violence/child abuse case : गुस्सा बाप का, दर्द मासूम का रोहतक में घरेलू कलह की बलि चढ़ी 4 साल की लाडली-हरियाणा के रोहतक में एक पिता ने घरेलू विवाद में गुस्से में आकर अपनी 4 साल की बच्ची को हवा में उछालकर सड़क पर पटक दिया, जिससे बच्ची का कंधा फ्रैक्चर हो गया। पुलिस कार्रवाई के बीच मां ने इसे निजी मामला बताकर केस दर्ज करने से इनकार कर दिया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट। हरियाणा के रोहतक की इंद्रा कॉलोनी से एक ऐसा सामने आया है, जिसने हर इंसान के दिल को झकझोर कर रख दिया। घरेलू कलह की आग में एक पिता इतना बेकाबू हो गया कि उसने अपनी ही 4 साल की मासूम बेटी को हवा में उछालकर सड़क पर दे मारा। बच्ची का कंधा फ्रैक्चर हो गया और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पुलिस हरकत में आ गई, लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि पीड़ित बच्ची की मां ने मामले को “निजी” बताते हुए कानूनी कार्रवाई से साफ़ इनकार कर दिया। यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है-क्या घरेलू गुस्सा बच्चों की जान पर खेलने का लाइसेंस बन गया है ?
घर की लड़ाई और मासूम पर बरपा क़हर
Domestic Spat Turns Brutal on Innocent Child
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी पिता जितेंद्र (मूल निवासी बरेली, UP) रोहतक की एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। मंगलवार की रात परिवार में किसी बात को लेकर तीखी बहस हो गई। गुस्से से लाल-पीले हुए जितेंद्र ने घर से बाहर निकलते ही सड़क पर खड़ी अपनी 4 साल की बेटी को पकड़ा और बिना किसी कारण उसे ताबड़तोड़ थप्पड़ मारे। डरी-सहमी बच्ची के कुछ समझ पाने से पहले ही उसने उसे दोनों हाथों से हवा में उठाकर पूरी ताकत से पक्की सड़क पर पटक दिया। आस-पास के लोग इस दृश्य को देखकर सन्न रह गए, और किसी ने मोबाइल से पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
बच्ची की हालत और मां का चौंकाने वाला रुख
Child’s Condition and Mother’s Shocking Stance
सड़क पर गिरने के बाद बच्ची लहूलुहान होकर दर्द से कराहने लगी। उसकी चीखें सुनकर माँ दौड़कर बाहर आई और बच्ची को गोद में उठाकर तुरंत PGI Rohtak के ट्रॉमा सेंटर ले गई। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि बच्ची के कंधे की हड्डी (shoulder bone) फ्रैक्चर हो गई है और शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें हैं। फिलहाल बच्ची का इलाज चल रहा है और वह खतरे से बाहर बताई जा रही है।
हालांकि, जब पुलिस ने मामला दर्ज करने के लिए माँ से बयान लेना चाहा, तो उसने साफ़ मना कर दिया। उसने कहा— “यह हमारा पर्सनल मैटर है, हम कोई केस नहीं करवाना चाहते।” इस बयान ने हर उस शख्स को चौंका दिया, जो बच्ची के हित में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा था।

पुलिस कार्रवाई और कानूनी पेचीदगियां
Police Action and Legal Complexities
घटना का वीडियो वायरल होने पर रोहतक पुलिस की CID टीम ने स्वत: संज्ञान लिया और आरोपी जितेंद्र के घर पहुंची। पुलिस ने पूछताछ की और मौके का निरीक्षण किया, लेकिन माँ के केस दर्ज करने से इनकार करने के कारण कानूनी प्रक्रिया अटक गई। भारतीय दंड संहिता (IPC) और POCSO Act के तहत बाल दुर्व्यवहार के मामले में पुलिस सुसंगत कार्रवाई कर सकती है, भले ही पीड़ित परिवार के सदस्य केस दर्ज न करवाना चाहे। लेकिन व्यवहार में पुलिस को पीड़ित के सहयोग की आवश्यकता होती है। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर रही है। इसके साथ ही जिला बाल संरक्षण इकाई को भी सूचित कर दिया गया है, ताकि बच्ची के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की निगरानी की जा सके।
निष्कर्ष-क्या बदलेगा-Will Anything Change ?
रोहतक की यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उस सोच का आईना है, जहां बच्चों को मां-बाप के गुस्से का निशाना बना दिया जाता है। पीड़ित मा का “निजी मामला” कहकर मामले को दबाना समाज के लिए एक खतरनाक संकेत है-यह बाल हिंसा को मान्यता देने जैसा है। यह समय है कि हम सब-समाज, पुलिस, कानून और स्वयं परिवार-मिलकर यह तय करें कि बच्चों की सुरक्षा किसी निजी मामले का हिस्सा नहीं हो सकती। कानून को सख्ती से लागू करना होगा, भले ही परिवार के लोग चुप्पी साधे रहें। साथ ही, घरेलू हिंसा और गुस्से पर नियंत्रण के लिए समाजिक स्तर पर जागरूकता, काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की भी सख्त ज़रूरत है। अगर आज हमने इस “निजी मामले” को अनदेखा किया, तो कल और मासूम जानें इसी क्रूरता की भेंट चढ़ जाएंगी। सवाल है-क्या हम एक बेहतर, सुरक्षित बचपन दे सकते हैं ?- फैसला हम सबका है।
पिता ने बेटी पर उतार पत्नी का गुस्सा मां बोली हमारा निजी मामला