Bageshwar Dham land Mafia : धीरेंद्र गर्ग का भाई शालिग्राम से जमीनी विवाद मे घायल, जिसे मारी गोली
Bageshwar Dham land Mafia : धीरेंद्र गर्ग का भाई शालिग्राम गिरफ्तार, किसान पर फायरिंग से खुली ज़मीन हड़पने की पोल-धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग की गिरफ्तारी, किसान पर फायरिंग से खुली ज़मीन हड़पने की पोल , बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग की गिरफ्तारी ने धार्मिक आस्था और अपराध की सीमा रेखा को फिर से परिभाषित कर दिया है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक गरीब किसान पर गोलियाँ चलाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए शालिग्राम ने उन तमाम सवालों को हवा दे दी है, जो बागेश्वर धाम के आसपास ज़मीनों के अर्जन और धीरेंद्र शास्त्री के हज़ारों करोड़ के साम्राज्य को लेकर उठते रहे हैं। क्या धर्म के नाम पर ग़रीबों की ज़मीनें छीनी जा रही हैं ? क्या पुलिस-प्रशासन इस बार भी मामला दबाएगा, या सच्चाई सामने आएगी ? आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं। बागेश्वर धाम विवाद-धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग की गिरफ्तारी, किसान पर फायरिंग, ज़मीन हड़पने के आरोप, पूरी कहानी हिंदी में पढ़ें।
घटना और गिरफ्तारी-Incident and Arrest
14 जुलाई 2026 की सुबह छतरपुर जिले के ग्राम कूड़े (कोड़ा) में एक भयावह घटना घटी। शालिग्राम गर्ग अपने तीन साथियों के साथ किसान मोतीलाल कुशवाहा के घर पहुंचा। आरोप है कि उसने मोतीलाल को लाठी-डंडों से पीटा और फिर पिस्टल से कई राउंड फायर किए। इन गोलियों में से एक मोतीलाल के पेट में जा लगी, जबकि दूसरी उनके कान को छूती हुई निकली। मोतीलाल कुशवाहा ने अपनी शिकायत में कहा, “शालिग्राम गर्ग मेरी ज़मीन हड़पना चाहता है। सुबह वह अपने साथियों के साथ आया, मुझे घर से बाहर घसीटा और लाठी-डंडों से पीटा। इसके बाद उसने 3-4 राउंड फायर किए, एक गोली मेरे सीने में लगी।” पुलिस ने FIR के आधार पर शालिग्राम गर्ग और उसके साथी अंकित मिश्रा को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) के तहत गिरफ्तार किया। दो अन्य आरोपी सतीश और आशीष अभी भी फरार हैं। घटना में प्रयुक्त हथियार को जब्त कर जाँच के लिए भेज दिया गया है।
जान लीजिए क्या रहा ज़मीन हड़पने के आरोप और पैटर्न-
Land Grabbing Allegations and Patterns
यह घटना उस पुराने विवाद को उजागर करती है, जो बागेश्वर धाम के आसपास के गांवों में ज़मीनों को लेकर चल रहा है। स्थानीय लोगों और वकीलों के अनुसार, ग्राम गढ़ा और आसपास के क्षेत्रों में ज़मीनें जबरन अधिग्रहित की जा रही हैं। स्थानीय वकील बृजकिशोर पाण्डेय ने आरोप लगाया, “गढ़ा गांव के पास ज़मीनों को जबरन हड़पा जा रहा है। बिना किसी अधिकार के बाउंड्री बनाई जा रही है। इसकी शिकायत पुलिस में भी की गई थी।” मोतीलाल कुशवाहा ने खुलासा किया कि वह एक अन्य भू-स्वामी जुगल किशोर पांडेय के मामले में अदालत में गवाही देने वाले थे, जिसके चलते उन पर हमला किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि “बाबा बागेश्वर” (धीरेंद्र शास्त्री) आश्रम के नाम पर ज़मीन चाहते हैं, लेकिन किसान अपनी ज़मीन देने को तैयार नहीं हैं, इसलिए झगड़े हो रहे हैं।
साम्राज्य और संपत्ति-Empire and Property
सवाल यह भी है कि आखिर बागेश्वर धाम के पास इतनी सारी ज़मीन कहां से आई? दैनिक भास्कर की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, गढ़ा गांव की कृषि योग्य ज़मीनों को अवैध रूप से आवासीय और व्यावसायिक प्लॉटों में बदला जा रहा है। इन प्लॉटों की कीमतें भोपाल और इंदौर जैसे शहरों के बराबर पहुंच गई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेज़ों के अनुसार, बागेश्वर धाम समिति द्वारा खरीदी जा रही ज़मीनों के स्वामित्व अधिकार शालिग्राम गर्ग के नाम पर पंजीकृत किए जाते हैं। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज यादव ने आरोप लगाया कि “धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने भाई के नाम पर ज़मीनें और संपत्तियां खरीदते हैं। इन संपत्तियों और फंडों के स्रोत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”

धीरेंद्र शास्त्री की प्रतिक्रिया-Dhirendra Shastri’s Response
घटना के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्वयं को अपने भाई और घटना से अलग करते हुए कहा, “मेरा शालिग्राम जी से कोई लेना-देना नहीं है। यह बात मैंने तीन साल पहले भी कही थी। मेरा अपने परिवार से कोई संबंध नहीं है, पूरी दुनिया और समाज ही मेरा परिवार है।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर वह दोषी है तो उसे कानून के अनुसार सज़ा मिलनी चाहिए।” उन्होंने दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने की माँग भी की।
राजनीतिक और कानूनी निहितार्थ-Political and Legal Implications
इस गिरफ्तारी ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी दलों ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी के डॉ. मनोज यादव ने आरोप लगाया कि शालिग्राम गर्ग को “वीआईपी उपचार” दिया गया और उन्हें पुलिस वाहन के बजाय निजी कार (इनोवा) में जेल ले जाया गया।
उन्होंने कहा, “शालिग्राम पूरे इलाके में खुला आतंक मचाता है,” और माँग की कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को भी जाँच में शामिल किया जाए और उन्हें आरोपी बनाया जाए। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रथम दृष्टया यह मामला ज़मीनी विवाद का प्रतीत होता है और जांच जारी है।
सबूत और जांच-Evidence and Investigation
पुलिस के पास वीडियो फुटेज, पीड़ित का बयान, गोली के निशान और जब्त हथियार सहित पर्याप्त साक्ष्य हैं। हालाँकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आरोपियों को वास्तविक सज़ा मिलेगी या पहले की तरह इस बार भी “धर्म का विरोध” का बहाना बनाकर मामले को दबा दिया जाएगा। इससे पहले भी जब किसी ने बागेश्वर परिवार के खिलाफ आवाज़ उठाई, तो उसे धर्म-विरोधी करार देकर खामोश कर दिया गया।
निष्कर्ष-Conclusion-शालिग्राम गर्ग की गिरफ्तारी ने बागेश्वर धाम की चमक-दमक के पीछे छिपी उस वास्तविकता को उजागर कर दिया है, जहाँ धर्म के नाम पर धंधा चल रहा है और ग़रीब किसानों की ज़मीनें जबरन छीनी जा रही हैं। मोतीलाल कुशवाहा पर हुआ हमला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि उस व्यवस्थागत शोषण की निशानी है, जिसमें कमज़ोर और अकेले किसान अपनी ज़मीन छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। अब देखना यह है कि क्या पुलिस-प्रशासन इस बार सच में कार्रवाई करता है, या फिर हर बार की तरह प्रभाव और धार्मिक दबाव में आकर मामला दबा दिया जाता है। यह मामला इस बात का भी संकेत है कि धार्मिक संस्थानों की वित्तीय पारदर्शिता और भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया पर सख्त निगरानी की आवश्यकता है, ताकि आस्था का दुरुपयोग अपराधों को छिपाने के लिए न हो सके।