Gurh Municipal Council Turns Political Battlefield :अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह साजिश और उत्पीड़न की बात कर रही हैं, तो दूसरी ओर विधायक नागेंद्र सिंह इसे राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं।
Gurh Municipal Council Turns Political Battlefield : गुढ़ नगर परिषद में सियासी संग्राम, भाजपा की ही दो ताकतें आमने-सामने, अविश्वास प्रस्ताव ने बढ़ाई खाई-गुढ़ नगर परिषद में सियासी संग्राम अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह बनाम विधायक नागेंद्र सिंह – भाजपा में अंदरूनी कलह उजागर-रीवा जिले की गुढ़ नगर परिषद में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भाजपा की ही दो नेताओं – अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह और विधायक नागेंद्र सिंह के बीच खुला संघर्ष। जानें पूरा मामला, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक समीकरण-मध्य प्रदेश के रीवा जिले की गुढ़ नगर परिषद इन दिनों एक बड़े राजनीतिक संग्राम का अखाड़ा बन गई है। यहाँ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विवाद इतना बढ़ गया है कि नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह और गुढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह खुले तौर पर आमने-सामने आ गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों नेता एक ही दल (भाजपा) से हैं, जिससे पार्टी की अंदरूनी कलह उजागर हो गई है। यह विवाद न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि आगामी चुनावों के लिहाज से भी अहम हो गया है।
अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह का आरोप-विधायक द्वारा रची गई साजिश
Chairperson Dr. Archana Singh’s Allegations-A Conspiracy Orchestrated by MLA
नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने विधायक पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए उन्हें सख्त हिदायत दी है। उन्होंने कहा, “विधायक अपनी हद में रहें, यदि मैंने कुछ कह दिया या सबूत सार्वजनिक कर दिए, तो वे मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।”
अविश्वास प्रस्ताव: राजनीतिक साजिश या प्रक्रिया ?
No-Confidence Motion-Political Conspiracy or Process ?
उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि विधायक द्वारा रची गई एक राजनीतिक साजिश है। उनके अनुसार, पार्षदों को घर बुलाकर इसकी पटकथा लिखी गई। यहाँ तक कि उनके पति डॉ. कल्याण सिंह के खिलाफ हुई लोकायुक्त कार्रवाई को भी उन्होंने इसी साजिश का हिस्सा बताया है।
उत्पीड़न के आरोप-Allegations of Harassment
डॉ. अर्चना सिंह ने आरोप लगाया कि विधायक के करीबी लोग उन्हें और उनके परिवार को प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधायक के असहयोग के कारण गुढ़ का विकास रुका हुआ है। उन्हें न तो विधायक निधि से राशि मिल रही है और न ही डीएमएफ या अन्य योजनाओं से। 13 पार्षदों द्वारा लगातार दो साल से बजट पास न करने के पीछे भी उन्होंने निजी स्वार्थों का हवाला दिया।
विधायक नागेंद्र सिंह का पलटवार-राजनीतिक स्टंट
MLA Nagendra Singh’s Counterattack-Political Stunt
दूसरी ओर, भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज एक ‘राजनीतिक स्टंट’ करार दिया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन्हें साबित करने के लिए दस्तावेजी साक्ष्य होने चाहिए।

सबूत मांगने की चुनौती-Challenge to Produce Evidence
विधायक का कहना है कि यदि अध्यक्ष कोई ठोस सबूत पेश करेंगी, तो वे उसका जवाब जरूर देंगे। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा की बात गलत है और वे हमेशा क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।
गुढ़ का विकास बनाम आंतरिक कलह-
Gurh’s Development vs. Internal Rivalry
इस विवाद के बीच गुढ़ का विकास सबसे बड़ा मुद्दा है। अध्यक्ष के अनुसार, विधायक के असहयोग से विकास कार्य ठप हैं। दूसरी ओर, विधायक का कहना है कि अध्यक्ष स्वयं प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लापरवाही बरत रही हैं। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनता की उम्मीदें और विकास की गति प्रभावित हो रही है।
भाजपा के लिए बड़ी परेशानी-A Headache for BJP
एक ही पार्टी की दो बड़ी हस्तियों के बीच यह खुला संघर्ष भाजपा के लिए चिंता का विषय है। यह घटना पार्टी की अंदरूनी एकता पर सवाल खड़े करती है और विपक्ष को राजनीतिक मुद्दा देती है। भाजपा आलाकमान की कार्यक्षमता को भी यह घटना कसौटी पर रखती है।
निष्कर्ष-Conclusion-गुढ़ नगर परिषद का यह विवाद एक स्थानीय मुद्दे से बढ़कर प्रदेश की राजनीति में अहम हो गया है। एक ओर अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह साजिश और उत्पीड़न की बात कर रही हैं, तो दूसरी ओर विधायक नागेंद्र सिंह इसे राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं। सच जो भी हो, इस संग्राम में सबसे बड़ा नुकसान गुढ़ क्षेत्र के विकास और भाजपा की छवि का हो रहा है। अब देखना होगा कि पार्टी आलाकमान इस आंतरिक कलह को कैसे सुलझाता है और क्या दोनों नेता जनता की उम्मीदों पर खरा उतर पाते हैं।