Scindia's Family 40'000 Crore Property Dispute : सिंधिया राजघराने के इस ऐतिहासिक समझौते ने 16 सालों से चले आ रहे कानूनी विवाद को विराम दिया है। यह समझौता न केवल पारिवारिक रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है
Scindia’s Family 40’000 Crore Property Dispute : 16 साल का विवाद आखिरकार सुलझ गया सिंधिया राज घराने का संपत्ति विवाद,अब होगा 40-हजार करोड़ का बंटवारा-ग्वालियर के पूर्व सिंधिया राजघराने की अरबों रुपए की संपत्तियों का अब विधिवत बंटवारा होने जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं-उषा राजे, वसुंधरा राजे व यशोधरा राजे-के बीच 16 साल से चले आ रहे संपत्ति विवाद को लंबी बातचीत के बाद आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है। दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को जिला कोर्ट में पेश कर दिया गया है। अब 8 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दोनों पक्षों की उपस्थिति दर्ज कराई जाएगी और समझौते की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होगी। करीब 40,000 करोड़ रुपए आंकी गई इन संपत्तियों का बंटवारा भारतीय इतिहास के सबसे बड़े पारिवारिक संपत्ति समझौतों में से एक माना जा रहा है।सिंधिया राजघराने की 40,000 करोड़ की संपत्ति का बंटवारा मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच 16 साल पुराना विवाद सुलझ चुका है। 8 जुलाई को कोर्ट में इसकी होगी औपचारिक पुष्टि। जानें किन-किन संपत्तियों का होगा बंटवारा।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई –
How Did the Dispute Begin ?
संपत्ति विवाद की जड़ें वर्ष 2010 में हैं, जब उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे ने जिला न्यायालय में दावा दायर किया था। तीनों बुआओं ने अदालत में कहा कि पिता की संपत्ति में बेटियों का भी समान अधिकार है, इसलिए उन्हें भी वैधानिक हिस्सा दिया जाए। उन्होंने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) के तहत अपनी हिस्सेदारी की मांग की। वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसका विरोध करते हुए अलग वाद दायर किया था। उनका तर्क था कि परिवार के सबसे बड़े पुत्र के रूप में उन्हें पैतृक संपत्ति पर प्राथमिक अधिकार है, जो ज्येष्ठाधिकार (primogeniture) की परंपरा के अनुरूप है। पूर्व राजघराने की संपत्ति से संबंधित दोनों प्रकरण जिला न्यायालय में विचाराधीन थे। हालांकि, यह विवाद 1961 में महाराज जीवाजीराव सिंधिया की मृत्यु के बाद से ही शुरू हो गया था, क्योंकि उन्होंने कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी। इसके बाद दशकों तक कानूनी लड़ाई चलती रही।
40,000 करोड़ की संपत्तियां-
Assets Worth Rs 40,000 Crore
पूर्व सिंधिया राजपरिवार की देश-विदेश में अरबों रुपए की संपत्तियां हैं, इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 40,000 करोड़ रुपए आंकी गई है।
मुख्य संपत्तियों में शामिल हैं-
- संपत्ति – Property – स्थान – Location
- जयविलास पैलेस -Jai Vilas Palace – ग्वालियर – Gwalior
- माधव विलास पैलेस – Madhav Vilas Palace – शिवपुरी – Shivpuri
- हैप्पी विलास – Happy Vilas – शिवपुरी – Shivpuri
- जॉर्ज कैसल – George Castle – शिवपुरी – Shivpuri
- कालियादेह पैलेस – Kaliadeh Palace – उज्जैन – Ujjain
- ग्वालियर हाउस – Gwalior House – दिल्ली – Delhi
- सिंधिया विला -Scindia Villa – दिल्ली – Delhi
- पद्म विलास पैलेस – Padma Vilas Palace – पुणे – Pune
- सिंधिया घाट – Scindia Ghat – वाराणसी -Varanasi
- विठोबा मंदिर – Vithoba Temple – गोवा – Goa
विशेष-आजादी के समय सिंधिया राजपरिवार के पास 100 से अधिक कंपनियों के शेयर भी थे, जो अब बंटवारे की प्रक्रिया में शामिल हैं।

जयविलास पैलेस-10,000 करोड़ की विरासत
Jai Vilas Palace-A Rs 10,000 Crore Heritage
सिंधिया परिवार की सबसे प्रमुख संपत्ति ग्वालियर का जयविलास पैलेस है, जो 12.40 लाख वर्गफीट में फैला हुआ है। इस भव्य महल की कीमत करीब 10,000 करोड़ रुपए आंकी गई है।
आयी जानें क्या हैं महल की विशेषताएं जो है अत्यंत भव्य –
- 400 कमरे, जिनमें 560 किलोग्राम सोने की सजावट है
- दुनिया का सबसे भारी झूमर (3,500 किलोग्राम से अधिक)
- चांदी की ट्रेन से भोजन परोसने की व्यवस्था
- इतालवी संगमरमर, फारसी कालीन और बहुमूल्य कलाकृतियाँ
- महल का एक हिस्सा संग्रहालय के रूप में जनता के लिए खुला है
विशेष-महल को 1874 में महाराजा जयाजीराव सिंधिया ने ब्रिटिश राज के दौरान बनवाया था, जिसे फ्रांसीसी वास्तुकार सर माइकल फिलोज़ ने डिजाइन किया था।
कोर्ट की प्रक्रिया और समझौता-
Court Proceedings and the Settlement
इस मामले की सुनवाई ग्वालियर जिला न्यायालय में वर्षों से चल रही थी। सितंबर 2025 में ग्वालियर हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को 90 दिन के भीतर आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का निर्देश दिया था। इसके बाद लंबी बातचीत चली और आखिरकार दोनों पक्ष सहमति पर पहुंच गए। समझौते को जिला कोर्ट में पेश कर दिया गया है। अब 8 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दोनों पक्षों की उपस्थिति दर्ज कराई जाएगी और समझौते की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होगी। गौरतलब है कि जनवरी 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट में भी इस मामले से जुड़ी सुनवाई थी, जहां दोनों पक्षों को राजीनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था।
निष्कर्ष-Conclusion-सिंधिया राजघराने के इस ऐतिहासिक समझौते ने 16 सालों से चले आ रहे कानूनी विवाद को विराम दिया है। यह समझौता न केवल पारिवारिक रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम और ज्येष्ठाधिकार की परंपरा के बीच संतुलन स्थापित करने का भी प्रयास है।-40,000 करोड़ रुपए की संपत्ति का बंटवारा भारत के इतिहास की सबसे बड़ी पारिवारिक संपत्ति समझौतों में से एक होगा। 8 जुलाई को कोर्ट में औपचारिक पुष्टि के बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह से अमल में आ जाएगी। यह समझौता भारत के पूर्व रियासतों से जुड़ी संपत्तियों के भविष्य को लेकर एक मिसाल कायम कर सकता है।